Wednesday, August 7, 2013

सपना

 मैंने देखा था एक सपना
हो न सका जो मेरा अपना
क्या हुआ जो एक सपना टूट गया
क्या हुआ जो एक बार किश्मत रूठ गया
किसके सारे सपने पुरे होते  हैं
मस्तमौला हैं वो लोग जो हमेशा ख़ुशी में जीते हैं।
सपने पूरे होना न होना रब की मर्जी है
हमारे हाथ में तो सिर्फ अर्जी है।
वो ऊपर बैठा सब देख रहा है
क्या कर रहे हो सपनो के लिए और कैसा तुम्हारा भेख (भेष) रहा है।
सपने यूँ ही पुरे नहीं होते
उसके लिए जी जान लगाना पड़ता है,
मेहनत करो, फल पाओ , ये ध्यान लगाना पड़ता है।
मैन देखा सपना , मेहनत भी किया,
पर क्या इस बात को इस से तौलूं , क्या लिया, क्या दिया?
मेरी कोशिश में कोई कमी रही होगी,
वरना सपने तो उनके भी पुरे होंगे जिनमे धुल जमी होगी
एक सपना अपना न  हुआ तो क्या सपने देखना छोड़ दूँ?
ज़िन्दगी सुहानी राह पर है, क्या उसे गलत दिशा में मोड़ दूँ?
कुछ सपने टूटने के लिए हीं बनते हैं,
जो पुरे होते हैं, उन्ही में से छनते है.
सारे सपने पुरे नहीं होते,
पर जो दिल की आवाज हैं वो अधूरे नहीं होते.
मेरा यही कहना है बार बार,
सपने देखो सौ हजार
उन्ही में से कुछ सपने पुरे होंगे, कुछ सबक सिखायेंगे

कुछ हाथ छूटेंगे, कुछ हाथ हाथो में आयेंगे

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ये मेरे द्वारा लिखी गयी कविता है , आपलोगों को कैसी लगी जरूर बताइए ताकि मेरा मनोबल बढे और जहा सुधार की आवश्यकता हो वहा सुधार की जाये। 

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