Wednesday, September 28, 2011

हमारे देश का दोहरा लोकतंत्र


अभी दुर्गापूजा का समय है। सभी इसकी तयारी में लगे हैं। हर जगह पूजा पंडाल बनाये जा रहे हैं। न्यायलय ने कहा है कि कोई भी पूजा पंडाल किसी पार्क में नहीं होना चाहिए। सही है, किसी पार्क में पंडाल नहीं बनना चाहिए, इस से समस्या आती है। पर काश हमारी अदालत को वो हर शुक्रवार को नमाज के कारन होने वाले सड़क जाम पर भी जाता कि इस से लोगो को कितनी परेशानी होती है। जिस सड़क के किनारे कोई मस्जिद हो दिल्ली में वो सड़क हर शुक्रवार को नमाज के समय बंद हो जाता है ताकि नमाजियों को कोई तकलीफ न हो, पर जो रोज आने जाने वाले लोग हैं वो परेशान हो। हर शुक्रवार को कोई सड़क पर नमाज पढ़ सकता है पर नौ दिनों के लिए पार्क में पंडाल नहीं बन सकता। मै पार्क में पंडाल बनाने के पक्ष में नहीं हूँ पर हर शुक्रवार को जाम होने वाले सड़क के बारे में भी कुछ किया जाये तो अच्छा होगा। मुझे लगता है इस से लोगो को ज्यादा परेशानी होती है। ये हमारे देश का ट्रेंड है कि जब भी मुस्लिम कट्टरपंथी कि बात आती है साथ में हिन्दू कट्टरपंथी कि बात भी जोड़ दी जाती है ये दिखने के लिए कि हम धर्मनिरपेक्ष हैं। जबकि सबको ये पता है कि आम हिन्दू उतना कट्टर नहीं होता जितना एक आम मुसलमान। एक हिन्दू जो किसी कट्टरवादी संगठन से जुदा है वही कट्टर होता है पर मुस्लिम सारे होते हैं। जिस दिन सारे हिन्दू कट्टर हो जाये उस दिन देश में लोकतंत्र नहीं रह पायेगा और देश नरक बन जायेगा पर कुछ हिन्दुओ को कट्टर होना जरुरी है वरना देश इस तुष्टीकरण कि भेंट चढ़ जायेगा और बन जायेगा हमारा देश भी एक दूसरा पाकिस्तान।
हमारे देश का लोकतंत्र अलग है, पूरी दुनिया में अल्पसंख्यको से भेदभाव किया जाता है और बहुसंख्यको को ज्यादा सुविधाए दी जाती है, पर हमारे देश में उल्टा है। यहाँ अल्पसंख्यक ही शेर हैं। हिन्दुओ को ही दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया जाता है। इसलिए मुठ्ठी भर हिन्दू कट्टरपंथियों का होना जरुरी है वरना हमें जीने नहीं दिया जायेगा। मै नहीं चाहता ही कि हमें कुछ ज्यादा पॉवर दिया जाये पर बराबर तो चाहता ही हूँ। यहाँ के मुसलमान वन्दे मातरम नहीं गा सकते जिसे गा गा कर क्रांतिकारियों ने देश आज़ाद कराया। ये हमारे देश का दुर्भाग्य है।
जय हिंद। जय भारत। वन्दे मातरम।