Wednesday, October 13, 2010

मेरी दूसरी प्रेम कविता

तुम मेरी दिल हो,
और तुम्ही मेरी मंजिल।
तुम खुश तो मै खुश,
वर्ना मेरा जीवन तो बस फूस फूस।
आई लव यु सो मच,
ये मेरे दिल की आवाज है सच।
तुम्ही जीवन हो और तुम्ही मेरा प्राण,
बिन तुम्हारे मेरा जीवन कहाँ?
तुम हो तो मै कुछ भी करू,
जो तुम नहीं तो मै जियूं ना, मरुँ।
तुम्ही ने तो मुझे प्यार सिखाया,
वर्ना मै तो था दिल से चौपाया।
आज तुम्हारा एहसान है मुझपर,
एक दया और करो,
वादा करो तुम मेरी रहोगी,
वर्ना मर जाऊँगा मै, इसपर गौर करो।
हम साथ रहे तो दुनिया हमारी है,
वर्ना चारो तरफ बेकारी ही बेकारी है।
तुम अप्सरा मेरी ज़िन्दगी, तुम्ही उर्मिला हो,
कसम खुदा की जो तुमसा प्यारा कोई मुझे मिला हो।
तुमसे सुन्दर इस दुनिया कोई है न होगा,
तुम्हे तो लाखो मिलेंगे, पर मेरा ना जाने क्या होगा?
एक तुम्हारा ही सहारा है,
वर्ना ये बंदा तो बेचारा है।
तुम कितनी प्यारी हो ये बताने की क्या जरुरत है,
तुमने मुझे अपनाया जो इस दुनिया में मुसीबत है।
तुम्हारा ये एहसान कभी नहीं भूलूंगा,
कभी आजमाना मुझे, वादा करता हूँ तुम्हारा दिल छू लूँगा।
तुमने मुझे इन्सान बनाया,
और मैंने तुम्हे अपनी जान बनाया।
प्यार की कीमत कोई क्या लगाएगा?
अगर कीमत लगाया तो पता नहीं क्या पायेगा?
तुम्हारी कीमत मुझे पता नहीं,
पर मै रहू तुमसे दूर करूँगा मै ये खता नहीं।
खुदा का शुक्र है मुझे तुमसा प्यार मिला,
तुम्हारा प्यार बरसता रहा मुझे ऐसा किस्मत यार मिला।
कृष्णा कान्त पाण्डेय। (KKAK)
सभी लोगो के कमेंट्स और आशीर्वाद से मै ये दूसरी कविता लिखने में सफल हुआ हूँ। उम्मीद है आगे भी आपलोगों का आशीर्वाद बना रहेगा।
जय हिंद, जय भारत।
वन्दे मातरम

Saturday, October 9, 2010

मेरी पहली प्रेम कविता

मै कैसे रहू तुम्हारे बिन
याद करो तुम वो दिन।
जब हम इश्क में डूबा करते थे,
लोगो को गुड बाय करते थे।
तुम्हे देखे बिन
न तो रात गुजरती ना ही दिन।
मै तो सपने पाला करता हु,
फिर भी कही तुम दूर न हो जाओ इस से डरता हूँ।
आज तुम्हे एक वादा करना होगा,
साथ ही तुम्हे जीना या मरना होगा।
सोचो वो कैसे ख़ुशी के पल होंगे
जब मेरी बाहों में तुम्हारी कूद उछल होंगे।
उस दिन का मुझे बेसब्री से इंतजार है
क्या करू? मुझे तुम्ही से प्यार है।
ये प्यार भी अजीब चीज होती है,
आशिक तो नाचीज होते हैं।
पता है मंजिल बहुत दूर है,
फिर भी लगे हैं क्योकि हम मजबूर हैं।
हमें पता है पास नहीं फेल है,
फिर भी लगे हैं जैसे ये कोई खेल है।
इस खेल में बहुत दर्द है,
पर मजे का कोई अंत नहीं।
तुम खेल कर तो देखो, ढाई अक्षर पढ़ कर तो देखो,
वडा रहा फिर तुमसे बड़ा कोई संत नहीं।
ये ढाई अक्षर जादू हैं,
इन्हें समझो, फिर देखो क्या होता है?
आसमान से तारे टूटेंगे,
और भी सबकुछ होगा जो तुमने सोचा है।
प्यार से बड़ी कोई बात नहीं,
उसका जीवन व्यर्थ है जिसके सर पर प्यार भरा कोई हाथ नहीं।
कृष्णा कान्त पाण्डेय
ये मेरे द्वारा लिखी हुई दूसरी कविता है। मै कोई कवी या लेखक नहीं हु पर मुझे लिखने का हमेशा शौक रहा है। सो जो मुझे लगा मैंने लिख दिया। आपलोगों का सहयोग और आशीर्वाद रहे, बहुत है.