Sunday, September 5, 2010

क्या औरंगजेब जैसे अत्याचारी के नाम पर कोई रोड होना चाहिए?

कभी कभी मुझे दिल्ली के व्यस्ततम इलाको में जाने का मौका मिलता है जो माननीय मंत्रियो और सांसदों के लिए बना है। उसी इलाके में सारे दूतावास भी हैं। पहले कभी कभी जाता था तो एक "औरंगजेब रोड" के नाम से रोड देखता था। एक गली भी थी "औरंगजेब लेन"। पहले तो नजरअंदाज कर देता था पर पिछले कुछ दिनों रोज का ट्रिप लगने लगा था। रोज वही औरंगजेब रोड, वही औरंगजेब लेन। अब नजरंदाज करना मुस्किल लगने लगा था। सो मै नजरअंदाज नहीं कर पाया। मेरे दिमाग में एक सवाल आया। "क्या औरंगजेब जैसे अत्याचारी और आततायी के नाम की कोई भी निशानी हमारे देश में होनी चाहिए?"। ये वही औरंगजेब है जिसने अपने शाशन काल में हमारा जीना मुश्किल कर दिया था। क्या उसके नाम से हमें अपने गुलामी के दिन नहीं याद आते हैं? क्या सिर्फ अंग्रेजो के ही हम गुलाम थे? उसके पहले क्या औरंगजेब जैसो के गुलाम हम नहीं थे? मै आपलोगों, सभी पाठको का विचार जानना चाहता हूँ। मै तो सोचता हूँ कि तुरंत औरंगजेब के नाम पर जितनी भी सड़के हैं, जितने शहरो के नाम हैं उन्हें बदल कर किसी महापुरुष के नाम पर रख देना चाहिए। आपलोग क्या कहते हैं ये बताइए। क्या हम "रावन मार्ग" "कंस मार्ग" या किसी भी राक्षस के नाम पर शहरो या सडको के नाम रख सकते हैं? फिर औरंगजेब क्या राक्षस नहीं था? औरंगजेब ने जितना अत्याचार हमपर किये हैं उतने अत्याचार तो अंग्रेजो ने भी नहीं किये हैं। मुझे इतिहास कि थोड़ी सी जानकारी है इसलिए मै ये कह रहा हूँ। यदि मै गलत हूँ तो आप बताइए। औरंगजेब ने हमारे सामने दो शर्ते रखी।
१- या तो मुस्लिम धर्म अपना लो
२- या जजिया कर दो
जजिया कर वो कर था जो गैर मुस्लिम देते थे। ये उनके लिए एक गारंटी थी कि आपको मजबूर नहीं किया जायेगा मुस्लिम होने पर। बावजूद इसके कितने लोगो को तलवार के बल पर धर्मं परिवर्तन कराया गया, ये तो सभी जानते हैं।
हमलोगों ने शायद दूसरा विकल्प अपनाया इसलिए आज तक अपने मुलधर्म में हैं। क्या ये हमारा अपमान नहीं है कि आज हम उस अत्याचारी को महिमामंडित करके उसके नाम पर सडको और शहरो के नाम रखे हैं। मेरा मकसद औरंगजेब के अत्याचारों को वर्णित करना यहाँ नहीं है, क्योकि हम में से सभी लोग इसके बारे में बहुत अच्छी तरह से जानते होंगे। मेरा मकसद बस ये है कि आपलोगों को सोचना चाहिए। कुछ लोग मुझे बोलेंगे कि ये बेकार का बहस है पर मै बोलता हु क्यों है ये बेकार का? इसलिए कि यह संभव नहीं है किसी मुस्लिम के नाम को हटाकर हिन्दू नाम रखना? फिर आप किसी मुस्लिम शाशक का ही नाम रख लो जो सबको प्यारा हो। वो अकबर हो सकता है या कोई और। किसी भी भले महापुरुष के नाम रख लो पर प्लीज़ औरंगजेब का नाम हटाओ। कितने मुस्लिम हैं जो चाहते होंगे कि औरंगजेब का नाम रहना चाहिए? मुझे तो नहीं लगता कि कोई भी मुस्लिम ऐसा होगा जो ये चाहता हो। और अगर चाहता होगा तो उसका मकसद यही होगा कि हम अपनी गुलामी को याद करते रहे। पर कोई मुस्लिम ऐसा नहीं चाहेगा कि देश के आधे लोग अपने गुलामी को याद करे। मुस्लिमो का नाम लेना तो कांग्रेस और कम्यूनिस्टो का काम है। जवाब जरुर दीजियेगा।
जय हिंद, जय भारत।
वन्दे मातरम।